देश की मजबूरी – राहुल जी

Rahul Gandhi

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सब की मांग है की युवा नेता राहुल जी को बड़ा ‘role’ दिया जाए। 

[ कांग्रेस पार्टी की महा-सम्मलेन के बाद सारे टीवी चैनल वाले सिर्फ येही निष्कर्ष निकाल पाए की – ‘सब की मांग है की युवा नेता राहुल जी को बड़ा ‘role’ दिया जाए।’, शायद भारत देश का बड़ा दुर्भाग्य येही है की हम बड़े मुद्दों को नज़र-अंदाज़ कर के पार्टी के निजी विचारों और उनकी अंदरूनी मंशा पर ज्यादा ध्यान देते हैं। ]

 

भाई कुछ  बातें समझ नहीं आई .. राहुल गाँधी 42 साल के हैं, जबकि  देश का युवा लगभग 25 साल का है .. फिर वो युवा कैसे हुए? और वो किस युवा का नेत्तृत्व करेंगे ? और उससे भी बड़ी बात ये की अगर उनको मौका दे भी दिया गया तो क्या होगा? कांग्रेस पार्टी के सिरमौर उनकी बातें कितनी सुनते हैं ये सबको पता है। बेहतर तो येही होगा की इस 42 साल के युवा नेता को अपनी पार्टी का युवराज हीं बने रहने दिया जाए और देश की ज़िम्मेदारी किसी और युवा को दी जाए। हम भारत-वासी एक और युवराज का बोझ नहीं झेल सकते, या यूँ भी कहा जा सकता है की हम अब कांग्रेस की परिवार-वाद निति और नहीं झेल सकते। राहुल गाँधी की सबसे बड़ी उपलब्धि ये है की उनके नाम के आगे ‘गाँधी’ शब्द जुड़ा हुआ है। और उनके इस नाम की वजह से हमे उनको झेलना पड़े, मै नहीं समझता की भारत की किस्मत इतनी खराब है। अगर नाम के आगे गांधी है तो अपने हीं घर पे युवराज बन कर रहें।

 

दूसरी बात जो समझ नहीं आई … कांग्रेस पार्टी की ऐसी नियत क्यूँ है की वो भारत की जनता पर अपने परिवार को थोपना चाहती है ? कांग्रेस हर दशक के बाद एक नया आन्दोलन छेडती है जिसमे वो अपने नए परिवार वालों के हमारे सामने पेश करती है और हमे ऐसा एहसास  है की जैसे भारत देश के भाग्य में कांग्रेस परिवार से बेहतर विकल्प नहीं है।


भाई ऐसा कब तक चलता रहेगा?

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